केंद्रीय सरकारी नौकरी छोड़ मानव सेवा का चुना मार्ग, कहते हैं— “एक्यूप्रेशर केवल दर्द का इलाज नहीं, बल्कि शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को जागृत करने की विज्ञान आधारित विधि है”; डायबिटीज़, बीपी, माइग्रेन, नसों के दर्द और ऑर्थोपेडिक समस्याओं में सहायक उपचार पर विशेष बातचीत।
रायपुर।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के दौर में भी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। ऐसी ही एक प्रभावी पद्धति है एक्यूप्रेशर, जिसके माध्यम से पिछले करीब 25 वर्षों से डॉ. अजय कुमार सिंह हजारों लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने एक प्रतिष्ठित केंद्रीय सरकारी नौकरी छोड़कर स्वयं को पूरी तरह मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
डॉ. सिंह का मानना है कि मानव शरीर स्वयं एक अद्भुत ऊर्जा तंत्र है। यदि शरीर के प्राकृतिक ऊर्जा बिंदुओं (रिफ्लेक्सोलॉजी पॉइंट्स) को सही तरीके से सक्रिय किया जाए तो कई शारीरिक समस्याओं में राहत मिल सकती है। उनके अनुसार एक्यूप्रेशर केवल दर्द कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को भी सक्रिय करता है।

इसी विषय पर कॉर्पोरेट इनसाइट के उप-संपादक विनय श्रीवास्तव ने डॉ. अजय कुमार सिंह से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश—
“एक्यूप्रेशर शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है”
डॉ. सिंह बताते हैं कि एक्यूप्रेशर में शरीर के विशेष बिंदुओं पर नियंत्रित दबाव दिया जाता है। इससे नसों और ऊतकों में ऊर्जा का संचार होता है, रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर की कार्यप्रणाली संतुलित होने लगती है। उनका कहना है कि जब ब्लड सर्कुलेशन सामान्य होता है तो दर्द और कई अन्य समस्याओं में राहत मिलती है।
डायबिटीज़ में भी मिल सकता है लाभ
डॉ. सिंह के अनुसार एक्यूप्रेशर डायबिटीज़ का विकल्प नहीं है, लेकिन सहायक चिकित्सा (Complementary Therapy) के रूप में यह काफी उपयोगी हो सकता है। अग्न्याशय (Pancreas) से जुड़े रिफ्लेक्सोलॉजी पॉइंट्स को सक्रिय करने से शरीर की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और ब्लड शुगर नियंत्रण में सहयोग मिल सकता है।
वे बताते हैं कि डायबिटीज़ के मरीजों में थकान, हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन और रक्त संचार से जुड़ी समस्याओं में भी सुधार देखा गया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों को अपनी नियमित दवाइयाँ और चिकित्सकीय सलाह जारी रखनी चाहिए।

तनाव और हाई बीपी में राहत का दावा
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव लगभग हर व्यक्ति की समस्या बन चुका है। डॉ. सिंह का कहना है कि एक्यूप्रेशर शरीर और मन दोनों को संतुलित करने में मदद करता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है, नींद में सुधार आता है और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी राहत मिल सकती है।
उनके अनुसार नियमित एक्यूप्रेशर सत्रों से कई मरीजों में सिरदर्द, घबराहट और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं में भी सुधार देखा गया है।
न्यूरो और लकवा के मरीजों के लिए भी सहायक
डॉ. सिंह बताते हैं कि नसों में दर्द, सुन्नपन, माइग्रेन और लकवा जैसी समस्याओं में भी एक्यूप्रेशर सहायक भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार यह नसों में ऊर्जा प्रवाह और रक्त संचार को बेहतर बनाता है।
उन्होंने कहा कि लकवा के मरीजों में एक्यूप्रेशर को फिजियोथेरेपी और अन्य चिकित्सकीय उपचारों के साथ अपनाने पर रिकवरी प्रक्रिया में सहायता मिल सकती है।

घुटनों, कमर और सर्वाइकल दर्द में 5 से 10 सत्रों में सुधार
ऑर्थोपेडिक समस्याओं पर डॉ. सिंह का कहना है कि घुटनों का दर्द, कमर दर्द, सर्वाइकल और जोड़ों की समस्याओं में मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार किया जाता है। कई लोगों को पहले सत्र से ही हल्का आराम महसूस होता है, जबकि सामान्यतः 5 से 10 सत्रों में स्पष्ट सुधार देखने को मिल सकता है।

20 से 45 मिनट का होता है एक सत्र
उन्होंने बताया कि एक्यूप्रेशर का एक सामान्य सत्र 20 से 45 मिनट तक चलता है। उपचार की अवधि मरीज की बीमारी और उसकी गंभीरता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि यह बिना दवा और बिना ऑपरेशन की प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है तथा अन्य कई उपचारों की तुलना में अपेक्षाकृत किफायती भी मानी जाती है।
ट्रेन में दर्द से तड़प रही युवती को मिली राहत
बातचीत के दौरान डॉ. सिंह ने एक रोचक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि ट्रेन यात्रा के दौरान एक युवती तेज दर्द से परेशान थी। उनके अनुसार ट्रेन में मौजूद अन्य चिकित्सकों के प्रयासों के बाद भी तत्काल राहत नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने नाड़ी परीक्षण कर कुछ विशेष एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर दबाव दिया, जिसके बाद कुछ ही मिनटों में युवती के दर्द में उल्लेखनीय कमी आई। डॉ. सिंह इसे किसी चमत्कार के बजाय शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा प्रणाली और एक्यूप्रेशर की प्रभावशीलता का उदाहरण मानते हैं।

स्वस्थ जीवन के लिए प्राकृतिक दिनचर्या अपनाने की सलाह
डॉ. सिंह का मानना है कि अधिकांश बीमारियों की जड़ अनियमित जीवनशैली है। उन्होंने लोगों को प्रतिदिन 10 से 15 मिनट स्वास्थ्य के लिए निकालने, हाथ-पैरों के महत्वपूर्ण एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर हल्का दबाव देने, नंगे पैर घास पर चलने, पर्याप्त पानी पीने, समय पर भोजन करने और नियमित व्यायाम करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, “बीमारी आने का इंतजार मत कीजिए। स्वास्थ्य की देखभाल आज से शुरू कीजिए। एक्यूप्रेशर केवल उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की एक सरल और प्राकृतिक कला है।”
नोट: एक्यूप्रेशर को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाता। गंभीर या पुरानी बीमारियों में किसी भी उपचार को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

